क्या राझ है?

ना हमने कुछ कहा उसे ना ही उसने,
हरपल आंखोंसे गुफ्तगु होती हमारी
फिर क्या राझ हैं इस होंठोंकी खामोशीका?

ना उसके आनेकी खुशी थी हमे कभी,
और ना ही उसके जाने का गम है आज
फिर क्या राझ हैं इस दिलकी उदासीका?

ना वो हमारे होने हैं कभी ना ही हम उसके
अनजान न थे हमारे ‘अक्स’ ए अंजाम से
फिर क्या राझ है इस बेहके जझबातोका?

– 💕Anku

वो आकर चली गई..!

वो फिर आ कर चली गई।
होंठों पे मुस्कान लौटा गई ,
कुछ किस्से वो महका गई ,
अनगिनत यादे बरसा गई,
वो फिर आ कर चली गई।
वो उन यादो के साथ आई,
जो बचपन तरो-ताज़ा कर गई,
हर बूंद एक एहसास दिलाती गई ,
यादोकी मासूम कली खिलती रही,
मुझे भी उस जगह खींच के ले गई,
जहा बिन कहे ये नैना भीगोती रही।
वो आई और आकर चली भी गई….!
मे बस वही जिंदगानी देखती रही !
बूंदे तो रुक कर खामोश भी हो गई….
मगर वो बचपनकी खनक गुंजती रही।
वह भीगी मिट्टीकी खुशबु महका गई..
जो हरपल दिलकी आश महकाती रही,
जो दिलसे जीनेकी ख़्वाहिश जगा गई।
वो तो बड़े ही शोख से बंद हो गई,…बस
मुजमे फिर से भीगने की प्यास जगा गई।
वो आई और आकर चली भी गई….!
बस मुजे मेरा वो बचपन वापस लौटा गई।

वो एक बेनाम रिश्ता…!

दुनियाकी नजरमें ये बस एक बेनाम रिश्ता है,
फिर भी न जाने क्यों इतना खास बन चला है।
तेरी खामोशी भी बहुत जल्द समझ लेती हु में..!
फिर भी तेरे ही अलफाज से तेरी खामोशी टूटे,
बस इसीलिए अक्सर अनजान बनी रहती हु में।
कभी किसी छोटी सी बात पर मेरा वो रुठ जाना..!
और तेरा बडे प्यारसे मेरे चेहरे पे मुस्कान ले आना,
ये लडाई-झगडना मानो हमे और करीब खींच रहा..!
न जाने क्यों कुछ ना होकर भी बहुत कुछ बन गया हैं,
वो एक बेनाम सा रिश्ता आज कुछ खास बन चला है।